Phir miloge? | Hindi Poem

मैंने शायद कहीं पढ़ा था, मन्दिरोँ से ज़्यादा सच्ची प्रार्थना अस्पतालों मे की जाती हैँ; विवाह घर से ज़्यादा शिद्दत से हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर लोग एक दूजे को गले लगाते हैं। विचित्र परन्तु सत्य (यह लिखते समय मुझे भी उतना ही विचित्र लग जितना आपको पढते समय)। कैसा लगता है जब आप किसी को विदा करने से पहले गले लगाते हैं। कैसा लगता होगा उस माँ को जब वो अपनी सन्तान को सरहद पर भेजते हुए, उस पिता को जब वो अपनी बेटी को विदा करते हुए और उस लड़की को जो मीलों दूर जा रहे अपने प्रेमी को गले लगाती है, शायद आखरी बार।




वो आखिरी बार जब तुमने गले लगाया,
इक सुकून था, इक सज़ा थी ||
सुकून, जो जिस्म को तोड़ गया,
सज़ा, जोड़ने को तू तन्हा छोड़ गया ||

वो आखिरी बार जब तुमने गले लगाया,
गर्माहट सी थी, ठंडक सी थी || 
गर्माहट, जो दो बेचैन रूहों को घोल गयी,
ठंडक, जो बिजली सी पाव से सिर तक दौड़ गयी ||

वो आखिरी बार जब तुमने गले लगाया,
इक खुशी सी थी, इक दर्द सा था ||
खुशी, उन दो पल सांसो के रुकने की,
अफसोस, उंन सांसो के दोबारा चलने का ||

वो आखिरी बार जब तुमने गले लगाया,
इक अश्क था, इक मुस्कान थी ||
अश्क, जो छुप न सका,
मुस्कान, जो कुछ छुपा न सकी ||

वो आखिरी बार जब तुमने गले लगाया,
इक ख़्वाहिश थी, इक हक़ीक़त थी ||
इक उम्मीद थी,
इक डर था ||

ख्वाहिश, तुम्हें बाहों में बांधे रखने की,
तुम्हारी खुश्बू भरी सांसों की ||
तुम्हारी बेहय्या चाहत की, मुहब्बत की,
तुम्हारे साथ जीने की ||

हक़ीक़त, जुदाई थी,
उम्मीद, दोबारा मिलने की||

डर, दोबारा न मिलने का ||


Share this: